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अपना पंथ फाउंडेशन - ज्ञान से मोक्ष की ओर

अपना पंथ फाउण्डेशन धर्म, राजनीति, विज्ञान तथा आध्यात्मिक को वैज्ञानिक सिद्धान्त पर रिसर्च करने की संस्था है। 

हमने लगभग 40-45 वर्षों तक सभी धर्मों का अध्ययन करते हुए मानव के मस्तिष्क क्रिया पर रिसर्च किया जिससे 

हमें ज्ञात हुआ कि मानव मस्तिष्क के चार भाग हैं। जिसके पीछे के भाग में सुख, शान्ति, आनन्द, परमानन्द जीवन 

जीने की एक इलैक्ट्रानिक तरंग जैसी शक्ति सक्रिय है। जो एक मौसम दुर्घटना द्वारा अस्त-व्यस्त हो गई है। जिसे एक 

वैज्ञानिक प्रयोग प्रमाण द्वारा प्रमाणित करने पर सभी प्रकार की बुराई एंव बीमारियाँ समाप्त की जा सकती हैं। तथा सभी मनुष्य अनादिकाल तक प्राकृतिक प्राणी के प्राकृतिक जीवन का परम- आनन्द ले सकते हैं और इस पृथ्वी को कोराना जैसे बैक्टीरियल तथा हाइड्रोजन जैसे अणु और परमाणु बम्मों से बचाया जा सकता है। इसकी स्थापना संन्यासी स्वामी बिजुलीनन्द सरस्वती जी के मार्गदर्शन में आचार्य हरिनन्द सरस्वती जी द्वारा हुई। इस संस्था मूल उद्देश्य मनुष्य को होने वाली बीमारियाँ जैसे हाई-लो-बी.पी, ब्लड कैंसर, ब्रेन हेमरेज, लकवा, टी-बी, कैंसर अन्य और नक्सलवाद, माओवाद , उग्रवाद, जेहाद, पूँजीवाद, नरसंहार जैसे परमाणु संयन्त्रों को जड़ से समाप्त कर प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा सामाजिक ज्ञान, निर्गुणज्ञान, अध्यात्मिकज्ञान तथा तत्वज्ञान को आधुनिक यंत्रों द्वारा वैज्ञानिक सिद्धान्त पर मानव मस्तिष्क मैं विकसित कर बुराई एंव बीमारी रहित लम्बीआयु का नीरोग जीवन व्यतीत कराना है। आधुनिक वैज्ञानिक सोच के समन्वय से मानसिक परिवर्तन कर जीवन की जटिलताओ को सरल बनाने, मानसिक तनाव को समाप्त कर करने और आंतरिक शान्ति प्रदान करने के लिए कार्यरत है।

Wer sich über winrolla informiert, findet schnell Hinweise auf eine durchdachte und gepflegte Plattform. Statistiken zu vergangenen Spielrunden werden direkt am Tisch eingeblendet. Mobile Spiele wurden von den Entwicklern speziell für Touch-Bedienung optimiert. Die VIP-Stufen unterscheiden sich in Cashback-Prozenten, Auszahlungslimits und exklusiven Boni. Das persönliche Dashboard bündelt Spielhistorie, Bonusübersicht und Kontostand an einer Stelle. Spieler können Feedback direkt an das Support-Team senden und so zur Weiterentwicklung beitragen. Mehrere Zahlungspartner sorgen für eine hohe Verfügbarkeit der Kassendienste rund um die Uhr. Die Plattform kooperiert mit Organisationen wie GamCare und BeGambleAware. Das Gesamtbild ist stimmig und lädt zu einem ausgiebigen Test ein.

मानव जीवन में शांति,ज्ञान और आध्यात्मिक विकास स्थापित करना।

अनुसंधान

प्राकृतिक जीवन, मस्तिष्क क्रिया और मानव सभ्यता के विकास पर आधारित हमारे ऐतिहासिक शोध का उद्देश्य सत्य की खोज है।

दर्शन

हमारा दर्शन मस्तिष्क शुद्धि द्वारा मानव जीवन को परमानंद, स्वास्थ्य, दीर्घायु और आत्मिक समाधान की ओर ले जाता है।

अपना पंथ के सिद्धान्त

(1) सभी मानव एक निराकार ईश्वर की क्रिया को जाने वह आपको जानती है आप उससे अनभिज्ञ हैं वह आपको अपना स्वामी मानती है।
(2) नारी का स्वरूप लाल और नर का रूप सफेद है इसी प्रकार का लिवास धारण करना मानवता का प्रतीक और अपना पंथी का सिद्धान्त है इससे एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है।
(3) मानव को वर्तमान की खोज करनी चाहिए क्योंकि इससे भूत-भविष्य का जन्म होता है इन दोनों की चर्चा से प्रश्न पैदा होता है, यही अज्ञानता का कारण है।
(4) प्राणी से रूद्रता, से तत्वज्ञान से निर्गुण से सगुण से शिक्षा से सामाज से अध्यात्मिक से धर्म से राजनीति से विज्ञान से बुराई का जन्म होता है। धर्म
(5) मावन जीवन का लक्ष्य लम्बी आयु, इन्द्रियों का सदुपयोग, बीमारी रहित जीवन, जीते जी मोक्ष की प्राप्ति, जीनव में अनेक प्रकार केचमत्कार यही अपना पंथ का आधार है।

योग का वैज्ञानिकीकरण सिद्धान्त

दुर्लभ अपना पंथ है, सन्त हरि समझाय !
गुरू साहिब की खोज से, ब्रह्नम रूप हो जाय !!

हृदय में एक वाल है, योग पलटबल खाय !
मन मस्तिष्क भागा फिरे, आत्म सिंध समाय !!

एक खड़ा दौ हटा, तीन ऊपर कूं जाय !
ता ऊपर संयोग से, बंक नाल खुल जाय !!

धर्म मन वैराग विज्ञान से, धर्म अनेक बनाय !
आत्म अपना पंथ है, अमन भक्ति घट माय !!

शीशा जैसा तू बना, सब जग रहा दिखाय ! एक शीशा खुद आप है, खुद को लखा ना जाय !!

अपना पंथ फाउंडेशन

अपना पंथ के सिद्धान्त

(1) सभी मानव एक निराकार ईश्वर की क्रिया को जाने वह आपको जानती है आप उससे अनभिज्ञ हैं वह आपको अपना स्वामी मानती है। 

(2) नारी का स्वरूप लाल और नर का रूप सफेद है इसी प्रकार का लिवास धारण करना मानवता का प्रतीक और अपना पंथी का सिद्धान्त है इससे एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है। 

(3) मानव को वर्तमान की खोज करनी चाहिए क्योंकि इससे भूत-भविष्य का जन्म होता है इन दोनों की चर्चा से प्रश्न पैदा होता है, यही अज्ञानता का कारण है। 

(4) प्राणी से रूद्रता, से तत्वज्ञान से निर्गुण से सगुण से शिक्षा से सामाज से अध्यात्मिक से धर्म से राजनीति से विज्ञान से बुराई का जन्म होता है। 

(5) मावन जीवन का लक्ष्य लम्बी आयु, इन्द्रियों का सदुपयोग, बीमारी रहित जीवन, जीते जी मोक्ष की प्राप्ति, जीनव में अनेक प्रकार केचमत्कार यही अपना पंथ का आधार है।

योग का वैज्ञानिकीकरण सिद्धान्त

दुर्लभ अपना पंथ है, सन्त हरि समझाय !

गुरू साहिब की खोज से, ब्रह्नम रूप हो जाय !! 

 

हृदय में एक वाल है, योग पलटबल खाय !

मन मस्तिष्क भागा फिरे, आत्म सिंध समाय !! 

 

एक खड़ा दौ हटा, तीन ऊपर कूं जाय !

ता ऊपर संयोग से, बंक नाल खुल जाय !! 

 

धर्म मन वैराग विज्ञान से, धर्म अनेक बनाय !

आत्म अपना पंथ है, अमन भक्ति घट माय !! 

 

शीशा जैसा तू बना, सब जग रहा दिखाय !

एक शीशा खुद आप है, खुद को लखा ना जाय !!

 

घोषणा

मनुष्य अपने जीवन का उजाला सुंढते-ढुंढते घनघोर अंधेरे में आकर अपने उद्धार के लिये किसी शक्ति द्वारा एक अनहोनी होने का इन्तजार कर रहा है। आज मानव के जीवन का वह इन्तजार समाप्त हो गया क्योंकि मैं विश्व मानव समुदाय के सपनों का वह वैज्ञानिक हूँ जिसके अन्वेषण उपलब्धि द्वारा मानव जगत से सभी प्रकार की बुराईयां एवं बीमारियां समाप्त होकर सतयुग-ईमान या प्रकृतिवाद की स्थापना होगी अर्थात् आदि पूर्वज लोगों ने अनेक सदियों से युग परिवर्तन होने की जो भविष्यवाणियां की हैं वह सभी भविश्यवाणियां मुझ सम्राट के प्रगट होने के लिये की गई थीं क्योंकि हमारे द्वारा सम्पूर्ण विश्व की शासन व्यवस्था अत्यन्त सरलता पूर्वक परिवर्तित होकर सभी देशों की सिमायें समाप्त हो जायेंगी। मुझे युग परिवर्तन करने के लिये जो अन्वेषण उपलब्धि प्राप्त हुई है वह आज के मानसिकता के अनुकूल सत्य-असत्य से ऊपर वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है और बच्चों के खेल जैसे अत्यन्त सरल साधारण है, हमारे रिसर्चबुक एवं प्रयोग क्रिया द्वारा हमारा कोई एक शिष्य भी इस दूषित मस्तिष्क क्रिया के युग से मानव संसार का उद्धार कर सकता है इसपर आप अविश्वास होने का प्राश्चित न करें वल्कि इसपर आप सरलता से विश्वास प्राप्त करने के लिये आठ दिन तक हमारा संगत करें तो आपको वैज्ञानिक प्रमाणों से यह ज्ञात हो जायेगा की सभी धर्मों का आविष्कार कैसे हुआ था अर्थात् प्राकृतिक प्राणी मानव अपने धर्म के सहयोग से सामाजिक प्राणी कैसे बन गया है इसपर विश्वास होते हि आप स्वयं हमारे मिशन में समर्पित हो जायेंगे और संसार की सभी उपलब्धियां मिथ्या प्रतित होने लगेंगी। 

नोट : – भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरिनन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित प्रकाषित लेख को किसी भी तरह से तोड़ मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी पुस्तक या सामाजिक न्यू जपेपर मैगजीन इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे ।किसी भी प्रकार के मुकदमे के लिए न्याय क्षेत्र दिल्ली रहेगा।

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