अपना पथ एक आध्यात्मिक समूह है जो ध्यान, सेवा और आत्मबोध के माध्यम से लोगों को आंतरिक शांति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है।
स्वर्ग-जन्नत व परमानंद जीवन का वैज्ञानिक प्रमाण = पाति-पत्नी जब आपस में सृष्टि विकास क्रिया करते हैं तो अंत में खुदा परस्ती या प्रकृतिवाद के अनुकूल पति का बीज पत्नी के गर्भ में इंजेक्ट हो जाता है उसी समय पति का मस्तिष्क क्षणिक बंद होकर मुंह में एक अस्वादिष्ट लार ग्रंथि आ जाती है और पति-पत्नी दोनों एक अति दुर्लभ जीवन आनंद का अनुभव करते हैं इस आनन्द के समक्ष आज के भौतिक मस्तिष्क के सभी अविष्कार या आनन्द तुच्छ हैं पर यह आनन्द क्षणिक है अगर हमारी प्रयोग विधि द्वारा मनुष्य के मस्तिष्क को लम्बे समय के लिए बंद करा दिया जाए और अस्वादिष्ट लार ग्रंथि लगातार मुंह में निकलने लगे तो यह पति-पत्नी के सृष्टि विकास क्रिया जैसे आनन्द नहीं वल्कि इस आनन्द से अनंत गुना उँचा परमानंद है, इसके बाद सभी प्राणियों की तरह सृष्टि विकास क्रिया मात्र नारी का विषय रह जाता है नर का नहीं जैसे आज नारी नर के आधीन है यह प्रक्रिया गलत है।हमारी खोज के अनुकूल मनुष्य को छोड़कर अन्य सभी प्राकृतिक प्राणी परमानंद का जीवन व्यतीत करते हैं ।क्योंकि सभी प्राणि एक दूसरे के साथ नंगे रहते हैं । नर प्राणी मादा के एक मात्र गर्भ धारण की पूर्ति के लिए समबन्ध स्थापित करता है, अपने प्राकृतिक जीवन के परमानंद में स्थापित हो जाने पर मनुष्य भी सभी प्राणियों के जैसे ही * नसा रहित * होकर नारी के अनुकूल मात्र सृष्टि विकास क्रिया तक सिमित हो जायेगा हमारी खोज के अनुकूल मनुष्य मस्तिष्क के अग्र भाग में दूषित तरंग क्रियानिवत है जिससे भौतिक मस्तिष्क का निर्माण हुआ है जिसमें जीवन जीने का प्रोग्राम नहीं है इसी को अज्ञानता कहते हैं और इसी भौतिक मस्तिष्क के कारण मनुष्य के मस्तिष्क में पीछे की तरफ खुदा के नूर या आदि-शक्ति या शिव-शक्ति नाम की इलेक्ट्रॉनिक तरंग जैसी शक्ति है जिसकी क्रिया निष्क्रिय हो चुकी है हमारी प्रयोग विधि द्वारा भौतिक मस्तिष्क को समाप्त कराकर आदि-शक्ति मस्तिष्क को क्रियान्वित करने पर शरीर सभी प्राकृतिक प्राणीयों के जैसे वैक्टिरियल प्रूफ परमानंद हो जाता है, इसी तरंग की निष्क्रियता से मनुष्य आनन्द विहीन होकर अधूरा एवं अज्ञान हो गया है और अपनी अज्ञानता से जीवन आनंद की प्राप्ति के लिए सृष्टि विकास क्रिया के अत्याचार के साथ सभी प्रकार के अपराध करने को मजबूर हो रहा है, और शरीर को वैक्टिरियल प्रूफ बनाने वाली इसी तरंग की निष्क्रियता से ही शरीर में सभी प्रकार की बुराइयाँ एवं बीमारियाँ उत्पन्न हो रही हैं
नोट : – भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरि नन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित ** सत्य या ईमान का पैगाम युग परिवर्तन का सिद्धान्त ** प्रकाषित लेख इत्यादि को किसी भी तरह से तोड़ – मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी भी सामाजिक न्यूजपेपर ,मैगजीन ,पुस्तक, इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे । किसी भी प्रकार के मुकदमें के लिए न्याय क्षेत्र दिल्ली रहेगा ।
( सन्त हरिनन्द सरस्वती = 9811074545 )
नोट : – भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरिनन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित प्रकाषित लेख को किसी भी तरह से तोड़ मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी पुस्तक या सामाजिक न्यू जपेपर मैगजीन इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे ।किसी भी प्रकार के मुकदमे के लिए न्याय क्षेत्र दिल्ली रहेगा।
हमारी आध्यात्मिक यात्रा में सहभागी बनें। संन्यासी स्वामी बिजुली नन्द सरस्वती जी के विचार, संदेश और कार्यक्रमों से जुड़ी ताज़ा जानकारी पाने के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर फॉलो करें। आइए, साथ मिलकर एक प्राकृतिक और शांतिपूर्ण जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।
अपना पथ एक आध्यात्मिक समूह है जो ध्यान, सेवा और आत्मबोध के माध्यम से लोगों को आंतरिक शांति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है।
Apna Path Foundation © 2025 All rights reserved | Design By HelloTechIndia