मानव धर्म का वैज्ञानिक सत्य: नसीहत एक यथार्थ की

नसिहत *
 
सम्पूर्ण संसार में अनेक सन्त, महात्मा, मनीषि, तपस्वी
भक्त, पैगम्बर, सिध्दगण, साहित्यकार,दार्शनिक, योगी
महाज्ञानियोँ ने धर्म शास्त्र,नीति शास्त्र,दार्शन शास्त्र,के द्वारा मानव को कर्म योग भक्ति योग,ज्ञानयोग के माध्यम
से साकार निराकार,निर्भिकार और आत्म स्वरूप का अवलोकन कराने का भरकम प्रयास किया।
लेकिन मनुष्य स्वयं वही है जो हजारों वर्ष पूर्व में था अहंकारी लोभी,लड़ाकू ,ईर्ष्यालु ,कर्म से परमदु:खी अविशवासी घमंडी बल्कि उसके आधुनिक जीवन में उच्छृखलता,उद्दणडता , चरित्र हीनता ,आर्थिक संकीर्णता,अनुशासन हीनता चरम सीमा पर है।
नैतिकता ,आदर्शता,आचार संहिता का जीवनसे पतन हो चुका है धर्म संगठन शिक्षा राजनीति ,विज्ञान,और इनके प्रचार मानव जीवन में शान्ति नहीं स्थापित कर सके बल्कि आज का मनुष्य अपने जीवन काल में सबसे ज्यादा दुखी है। मातृ-भूमि और मानव सभ्यता अणु-परमाणु की खोज से विनाश की तरफ बढ़ रही है ।
क्योंकि किसी भी महाज्ञानी ने आध्यात्मिक विषय का कोई वैज्ञानिकीकरण नहीं किया आज विज्ञान का जमाना है।जब तक तत्वज्ञान या आत्म ज्ञान तथा धर्म को विज्ञान में रूपान्तरण नहीं किया जायेगा तब तक मानव के जीवन में धर्म अन्धविश्वास बन कर रह जाता है ।
हमारा उद्देश्य है कि आज तक जिन महान पुरूषों ने अपने आत्म ज्ञान के सत्य मार्ग को जाना उन्ही का नाम कर्म की दुनिया में अमर है ये सभी महान पुरूष प्रकृतिवादी थे या हैं।हम उनके कर्मो की प्रशंसा करके महान बनना चाहते हैं न कि उनके जैसे कर्म करते हैं। मानव ने धर्मो में विभाजन करके मानव एकता को खणिडत कर अपने जीवन के पथ से वंचित हो गया है जबकि अपना जीवन सभी धर्मों से सर्वोच्च महान है । आज धर्म के नाम पर हमारा जीवन विनाश की कगार पर खड़ा है ।जबकि धर्म एक (शब्द ) के अलावा कुछ भी नहीं है।मनुष्य की प्राकृतिक जीवन क्रिया का नाम ही धर्म है मानव न तो भूत है ना भविष्य है मानव तो वर्तमान है ।
धर्म शास्त्रों की रचना का ज्ञान हमारी मस्तिष्क क्रिया का ज्ञान नहीं होने के कारण वह हमारे मस्तिष्क को बैटरी की तरह कुछ समय के लिए क्रियान्वित करता है।और फिर समाप्त हो जाता है।फिर सत्यसंग या धर्म के द्वारा मस्तिष्क को संचालित किया जाता है इसी कारण रामायण से राम गीता से कृष्ण कुरानऐ पाक से मौहम्मद बाईबल से ईसा-मसीह गुरुग्रन्थ से नानक सहाब नहीं बन पाये हमारी खोज ज्ञान इन्द्रियों तथा कर्म इन्द्रियोंको डाईनोमीटर की तरह हमेशा वर्तमान में क्रियान्वित करता रहता है।इससे मस्तिष्क में बुराई और बीमारी का जन्म ही नहीं होता है।आज पूरा मानव जगत इनही से परेशान है। जबकि सिंगर खोज से पूरा मानव जगत कपडा पेहनता है तथा एडिशन की खोज से पूरी दुनिया में उजाला किया जा सकता है और परमाणु की खोज से पूरी दुनिया को मिटया जा सकता है।ईसी तरह हमारी खोज के द्वारा पूरे मानव जगत को बचाया जा सकता है।जो कि100%विज्ञान है।
हमारी स्वतन्त्र अन्वेषण की पुस्तक आदि-शक्ति पुराण
सन् 16/12 /2012 / को प्रकाषित हुईं थी जिसकी सम्पूर्ण थ्योरी और प्रक्टिकल वर्तमान विज्ञान पर आधारित है।मनुष्य एक निश्चित कारण द्वारा अपने प्राकृतिक मस्तिष्क क्रिया से अज्ञान हो गया है इसलिए
इसे खुदा-परमेश्वर,भगवान,पैगम्बर,महात्मा,गुरु-शिष्य की आवश्यकता होती है। मानव के प्राकृतिक जीवन रसायन क्रिया का ज्ञान सभी मनुष्यों के मस्तिष्क में
क्रियान्वित है । इसको किसी धर्म द्वारा सीखने की
आवश्यकता नहीं है बल्कि सीखने की विधि को अपना कर मनुष्य में प्राकृतिक मस्तिष्क क्रिया का गुण लगभग
लुप्त हो गया है ।
हमारी खोज के द्वारा मस्तिष्क सीधा प्राकृतिक गुण में प्रवेश कर जाता है। जिससे कैंसर,एड्स,हार्टअटेक,टी-बी, ब्लड प्रेशर हाई या ब्लड प्रेशर लो या बैक्टीरिया सम्बंधित अन्य बीमारीयाँ मात्र 10 से 20 दिनमें समाप्त
होजाती हैं।और आधुनिक भौतिक जीवन क्रिया से विमुख होकर आदर्श शान्त जीवन में समाहित हो जाता है।जिससे इन्द्रियों का सदुपयोग ,बीमारी रहित जीवन
लम्बी आयु सम्मानित जीवन जीते जी मोक्ष की प्राप्ति यही मानव जीवन जीने का मूल उद्देश्य होग ।

नोट : – भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरिनन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित प्रकाषित लेख को किसी भी तरह से तोड़ मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी पुस्तक या सामाजिक न्यू जपेपर मैगजीन इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे ।किसी भी प्रकार के मुकदमे के लिए न्याय क्षेत्र दिल्ली रहेगा।

हमसे जुड़ें

हमारी आध्यात्मिक यात्रा में सहभागी बनें। संन्यासी स्वामी बिजुली नन्द सरस्वती जी के विचार, संदेश और कार्यक्रमों से जुड़ी ताज़ा जानकारी पाने के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर फॉलो करें। आइए, साथ मिलकर एक प्राकृतिक और शांतिपूर्ण जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।