फिलॉसफी

Philosophy

1. मानव के शरीर में मस्तिष्क वह यंत्र है जिससे मनुष्य अपने जीवन क्रिया को चलाता है, हमारे मस्तिष्क रिसर्च में अपराधी कर्म एवं बीमारी पैदा करने वाली तरंग की खोज किया गया है तथा इस दूषित तरंग क्रिया को मानव मस्तिष्क से समाप्त करने के लिए हमने कुछ लोगों पर इसका प्रयोग प्रमाणित किया है, इससे हमारे पास आज के वैज्ञानिक मानसिकता के अनुकूल रिसर्च की वह उपलब्धि है जिसके द्वारा वैज्ञानिक यंत्रों से प्रमाणित करके सभी मनुष्य के दूषित मस्तिष्क क्रिया को प्रयोग द्वारा मात्र 21 दिन के 21 घंटे में समाप्त करा दिया जायेगा इससे मनुष्य चिंता रहित सरल साधारण बालक जैसे हो जाता है और उसका शरीर वैक्टिरियल प्रूफ, परमानंद हो जायेगा जिससे वह दीर्घायु का जीवन व्यतीत करेगा तथा अंत में उसकी मृत्यु दुःख रहित होगी या वह व्यक्ति चाहेगा तो मृत्यु के समय अपना सिथिल शरीर बायुमंडल में लुप्त कर लेगा। जैसे हमारे खोज में पाया गया है कि सभी स्वतंत्र जीवन धारी प्राकृतिक प्राणियों का शरीर मृत्यु समय वायुमंडल में लुम हो जाता है ऐसे ही यहूदी धर्म के संथापक मूसा अली सलाम, भारत के महात्मा कबीर एवं मीरा बाई कि अर्थी लुप्त हो गई है।

2. अपने भौतिक ज्ञान द्वारा सुख, शांति, आनंद का जीवन पाने के लिए मनुष्य धर्म, राजनीति, विज्ञान से ना-ना प्रकार का आविष्कार कर आज तक दुखी एवं बृहद उत्तेजित होकर अधुरा जीवन व्यतीत करता आया है। जबकि मनुष्य का प्राकृतिक जीवन परमानंद है और प्राकृतिक मस्तिष्क के परमानन्द जीवन में स्थापित होने पर मनुष्य की सभी आवश्यकताएं अपने आप पूर्ण हो जाती हैं, ऐसा ही जीवन प्रकृति के सभी स्वतंत्र जीवन धारी प्राणियों का है। इसके बाद मनुष्य को कुछ और प्राप्त करना शेष नही रह जाता है।

3. दूषित मस्तिष्क क्रिया के इस युग को परिवर्तित कर मानव सृष्टि को विनाश होने से बचाने के लिए मुझे अपने मस्तिष्क रिसर्च का वैज्ञानिक प्रमाण मानव जगत में प्रस्तुत करना होगा, इसके लिए हमने एक प्रार्थना पत्र के साथ अपने “रिसर्च बुक” से 22 पेज का सचित्र रिसर्च विवरण दिनांक 27/06/2018 को केन्द्रीय मस्तिष्क रिसर्च सेंटर मानेसर-गुडगाँव, हरियाणा को दिया था तथा इसको अविलम्व प्रमाणित कराने के लिए हमने माननीय राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री एवं मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष को भी प्रार्थना पत्र दिया है पर हमे मानेसर मस्तिष्क रिसर्च सेंटर द्वारा आज तक कोई सुचना नहीं प्राप्त हुई है।

4. आज मनुष्य का जीवन जटिल से जटिल बीमारियों एवं जटिल से जटिल अपराधी कर्मों के अधीन है तथा दूषित मानसिकता के आविष्कार द्वारा धरती से छः से आठ समय सृष्टि विनाश करने का परमाणु अख-सत्र बनाकर मनुष्य अपने को पतन के किनारे खड़ा कर दिया है इसलिए इस दूषित मानसिकता के युग को परिवर्तित करना अनिवार्य है।

5. हमारा यह मस्तिष्क अन्वेषण का प्रयोग प्रमाण मनुष्य का अंतिम आविष्कार होगा, इसके बाद मनुष्य को भविष्य में किसी अन्य आविष्कार की आवश्यकता नहीं रहेगी, क्योंकि इसके बाद ज्ञान की सीमा समाप्त हो जाती है।
रिसर्च

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अपना पंथ फाउण्डेशन की पुस्तक का अध्यात्मिक नाम आदिशक्ति पुराण और राजनीतिक नाम भारतीय प्रचीन इतिहास तथा वैज्ञानिक नाम रिसर्चबुक या जीवनज्ञान है ।

आदिशक्ति पुराण

(सत्युग-ईमान का पैगाम)

आत्मज्ञान, मोक्ष, परमानन्द-जन्नत, सत्य-ईमान भगवान, खुदा-परमेश्वर, सनातन का वैज्ञानिक विवरण

यह उपलब्धि रिसर्च बुक “सत्य-ईमान की तलाश” पर आधारित है तथा इसमें दिये गये सभी विवरण प्रयोगात्मक प्रमाणित हैं।

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