अपना पथ एक आध्यात्मिक समूह है जो ध्यान, सेवा और आत्मबोध के माध्यम से लोगों को आंतरिक शांति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है।
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REAL TRUTH OF LIFE & SCIENTIFIC THEORY OF LIFE
सत्य या ईमान का पैगाम
युग परिवर्तन का वैज्ञानिक सिद्धान्त
ए – (1) : – मानव के शरीर में मस्तिष्क वह यंत्र है जिससे मनुष्य अपने जीवन को चलाता है अर्थात मनुष्य के जीवन में अच्छाई या बुराई के रूप में जो भी पैदा होता है वह मस्तिष्क क्रिया से पैदा होता है इसलिए इस दूषित
मस्तिष्क क्रिया के युग को अगर परिवर्तन करना है तो वह एक मात्र मनुष्य के मस्तिष्क क्रिया में परिवर्तन करने से ही सम्भव होगा अर्थात अन्यकोई और विकल्प नहीं है मस्तिष्क में अपराध पैदा करने वाली तरंग की खोज करके उसे प्रयोग द्वारा समाप्त कर दिया जायेगा तो सभी मनुष्य अपने-आप अपराध मुक्त या बीमारी रहित होते चले जायेंगे । हमने पचासों वर्षों तक सनातन धर्म के “कर्म योग एवं ज्ञान योग “द्वारा अपने मस्तिष्क में कार्य रत दूषित तरंग से उत्पन्न भौतिक मस्तिष्क को समाप्त करके अपने प्राकृतिक मस्तिष्क में स्थापित होकर सभी धर्मों का अन्वेषण करते हुए मानव के मस्तिष्क में कार्य रत तरंगों पर रिसर्च किया है । इससे हमें ज्ञात हुआ है कि “सनातन धर्म =मानव धर्म ” आज के धर्मों जैसे मूर्ति में प्रेत-आत्मा की पूजा या पाठ या कलमा पढने का धर्म नहीं है बल्कि वह मानव के मस्तिष्क क्रिया का रिसर्च है जिसमें दूषित कर्म पैदा करने वाली तरंग की पहचान कर उसे प्रयोग द्वारा मस्तिष्क से समाप्त करने के लिए एक विशेष आचार्यसंहिता एवं प्रयोग-विधि बताई गई थी जिससे मनुष्य के मस्तिष्क – शरीर में एक अत्यंत दुर्लभ आनन्द-परमानंद या स्वर्ग-जन्नत जैसी अनुभूति होती है
इस क्रिया द्वारा मनुष्य मस्तिष्क का वह ज्ञान चक्षु भी अपने-आप खुल जाता है जिससे हम तीनों कालों को एकसाथ देख सकते हैं यही वह असाधारण-जीवन विधि है जिससे एक मात्र मनुष्य वंचित है या कमी मेहसूस करता है ।ध्यान दे = मनुष्य “कर्म योग – ज्ञान योग या नमाज़ “द्वारा जब अपने मस्तिष्क से दूषित तरंग क्रिया को समाप्त करके अपने प्राकृतिक मस्तिष्क क्रिया के जीवन में स्थापित होता है तो मस्तिष्क में कम्प्यूटर के स्क्रीन जैसे एक पर्दा बन जाता है उस पर्दे पर मनुष्य अपने प्रश्न को प्रदर्शित कर चिन्तन द्वारा उसका उत्तर प्राप्त करता है और यह उत्तर अकाट्य सत्य होता है इसी पर्दे पर अपना प्रश्न प्रदर्शित करके भगवान शंकर या बाबा आदम ने “सामवेद ,ब्रह्मपुराण “एवं मनुॠषि ने “मनुस्मृति “तथा पैगम्बरों ने “कुरआनपाक “उतारा था ऐसे ही पर्दे पर चिन्तन करके यह पुस्तक उतारी गई है।अभी हमारे द्वारा प्रस्तुत सनातन धर्म के मस्तिष्क परिवर्तन प्रयोग विधि से सभी मनुष्य त्रिनेत्र के इस पर्दे को धारण करके इस सच्चाई को अपने आप के अंदर देख सकते हैं।
नोट : – भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरि नन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है ।अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित ** सत्य या ईमान का पैगाम युग परिवर्तन का सिद्धान्त ** प्रकाषित लेख इत्यादि को किसी भी तरह से तोड़ – मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी पुस्तक या सामाजिक न्यूजपेपर ,मैगजीन ,इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे । किसी भी प्रकार के मुकदमें के लिए न्याय क्षेत्र दिल्ली रहेगा ।
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( सन्त हरिनन्द सरस्वती 9811074545 )