अपना पथ एक आध्यात्मिक समूह है जो ध्यान, सेवा और आत्मबोध के माध्यम से लोगों को आंतरिक शांति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है।
(1) हजरत इब्राहिम की प्राकृतिक मानसिकता की निर्गुण ज्ञान की उपलब्धि मोहब्बत (मोंह-माया) की कुर्बानी को इस्लाम अपने भौतिक मानसिकता से मांसाहारी भोजन का उधाहरण मानता है। हमारे अध्ययन के अनुकूल हजरत मोहम्मद साहब ने भी अपने समय काल में शिकार खेलने पर प्रतिबंध लगाया था। अतः मांसाहारी भोजन सनातन धर्म के विपरीत है क्येंकि मनुष्य साकाहारी या मांसाहारी प्राणी नहीं है। अर्थात मनुष्य केवल बीज खाता है। (भारतीय कॉपीराइट एक्ट लागू है)
(2) सनातन धर्म की उपासना सोहम् है अर्थात मनुष्य के अंदर सब कुछ है इसके अनुकूल प्रारंभ में अपने मस्तिष्क को दर्शन क्रिया से प्रवीण करने के लिए पत्थर के गोल पिंड (काबा या शिव लिंग) का प्रति-दिन दर्शन कर के योग-नमाज करना अनिवार्य है हजरत मोहम्मद साहब ने भी प्रारंभ में काबा का प्रति-दिन दर्शन कर नमाज पढ़ा और दर्शन प्रवीण होने के बाद मदीना गये थे। जबकि मजहबे इस्लाम के अंदर जीवन में एक समय काब का दर्शन करना या हज करने को धार्मिकता बताया गया है। यह सनातन धर्म के विपरीत है। (भारतीय कॉपीराइट एक्ट लागू है)
(3) सनातन धर्म के अनुकूल आत्मा (खुदी) को नमाज या योग द्वारा पाक करने पर खुदा-परमेश्वर उस पाक मानसिकता के व्यक्ति से स्वंयम सम्पर्क कर लेता है इसलिए सनातन धर्म में जीवन को पाक करने वाला योग या नमाज खुदी की इबादत है। पर इस्लाम द्वारा इसे खुदा की इबादत कहना अंधविश्वास है और यह सनातन धर्म के विपरीत है। (भारतीय कॉपीराइट एक्ट लागू है)
(4) सनातन धर्म मोक्ष की उपासना का धर्म है अर्थात जो व्यक्ति सनातन धर्म के कर्मयोग या ज्ञानयोग एंव नमाज से अपने आत्मा या खुदी, खुदा-परमेश्वर में अपने-आप विलय हो जायेगी वह जमीन पर नहीं रहेगी । अगर उस व्यक्ति की मजार या समाधि में शक्ति है यह मान कर इस्लाम के जैसे वहाँ दुआ पढ़ा जाये तो उस पाक खुदी वाले व्यक्ति की इबादत का घनघोर अपमान है। यह हिन्दू के मूर्ति-पूजा जैसे ही अंधविश्वास है। और यह सनातन धर्म के विपरीत है। (भारतीय कॉपीराइट एक्ट लागू है
नोट : – भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरिनन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित प्रकाषित लेख को किसी भी तरह से तोड़ मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी पुस्तक या सामाजिक न्यू जपेपर मैगजीन इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे ।किसी भी प्रकार के मुकदमे के लिए न्याय क्षेत्र दिल्ली रहेगा।
हमारी आध्यात्मिक यात्रा में सहभागी बनें। संन्यासी स्वामी बिजुली नन्द सरस्वती जी के विचार, संदेश और कार्यक्रमों से जुड़ी ताज़ा जानकारी पाने के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर फॉलो करें। आइए, साथ मिलकर एक प्राकृतिक और शांतिपूर्ण जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।
अपना पथ एक आध्यात्मिक समूह है जो ध्यान, सेवा और आत्मबोध के माध्यम से लोगों को आंतरिक शांति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है।
Apna Path Foundation © 2025 All rights reserved | Design By HelloTechIndia