मनुष्य के भोजन का वैज्ञानिक विवरण

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REAL TRUTH OF LIFE & SCIENTIFIC THEORY OF

सत्य या ईमान का पैगाम

युग परिवर्तन का सिद्धान्त
ए – ( 4 ) : – मनुष्य के भोजन का वैज्ञानिक विवरण = मनुष्य के आकार का मांसाहारी सभी नर प्राणी मादा के गर्भ धारण के लिए एक वर्ष में मात्र दो से तीन दिन तक ही सृष्टि विकास क्रिया कर पाते हैं और अन्य शाकाहारी प्राणियों में नर प्राणी अपने समय के अनुकूल नारी के गर्भ धारण की पूर्ति में मात्र एक दिन में ही लगभग छः से आठ समय तक सृष्टि विकास क्रिया कर लेते हैं और बीजाहारी नर मनुष्य नारी के गर्भ धारण के लिए अपने समय के अनुकूल एक दिन में सामान्यतः एक से दो समय ही सृष्टि विकास क्रिया करते हैं । बीजाहारी व मांसाहारी नर कुत्ता प्राणी भी वर्ष में मात्र दो से तीन दिन ही सृष्टि विकास क्रिया कर पाते हैं ।अर्थात मनुष्य प्राणी में मांसाहारी प्राणियों से 350 गुना अधिक एव शाकाहारी प्राणियों से 4 गुना कम सृष्टि विकास क्रिया करने की शक्ति है । यह प्रकृतिवाद या खुदा परस्ती है ।
ध्यान दे = चल-अचल सभी जीवधारियों का शरीर बीज बनाने का मात्र एक यंत्र है अर्थात किसी भी जीव धारी का शरीर अपने भोजन से शोषण किये पदार्थ या घोल को पित-कफ-वात में तब्दील कर लेता है और पित्त तत्व चमड़े बनाने एवं भोजन पचाने के लिए उपयोग होता है कफ तत्व से हड्डी की सुरक्षा के लिए मांस का निर्माण होता है एवं वात तत्व से हड्डी एवं बीज बनता है।
शाकाहारी कोई भी प्राणी जो भोजन करता है प्रकृतिवाद के अनुकूल उस भोजन से शोषण किये पदार्थ को शरीर पित्त तत्व एवं कफ तत्व से अलग करके वात तत्व के द्वारा बीज बना लेता है और उसके मांस एवं चमड़े में वात तत्व नहीं रहता है इसलिए इनके मांस या चमड़े को खाने वाला किसी भी मांसाहारी प्राणी का शरीर जिनकी ह्रदय गति की रफ्तार शाकाहारी प्राणी से बहुत अधिक होती है तो इनमें नाम मात्र बीज बन पाता है जिससे मांसाहारी प्राणी आवश्यकता से अधिक उत्तेजित होकर वर्ष में मात्र दो से तीन दिन ही सृष्टि विकास क्रिया कर पाते हैं ।इसी तरह बीजाहारी मनुष्य जिसका हृदय गति शाकाहारी प्राणी से मात्र तीन से चार गुना अधिक है अगर वह मांसाहार भोजन खायेगा तो उसके शरीर में बीज नहीं बनेगा अगर नाम मात्र बना भी तो उससे मनुष्य आवश्यकता से अधिक उत्तेजित हो जायेगा और अपने इस दूषित बीज को हमेशा छीण करने का प्रयास करेगा इसी कारण आज अधिक सन्तान एवं बलात्कार आदि घटना होती हैं ।
( इसलिए मनुष्य केवल बीजाहारी प्राणी है ) मांसाहारी या शाकाहारी नहीं है बल्कि शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन करने से मनुष्य की मस्तिष्क क्रिया में परिवर्तन होता आया है पर मनुष्य जीवित रह सकता है लेकिन शाकाहारी प्राणी गाय ,बकरी ,हिरण आदि केवल मांस खाकर या मांसाहारी प्राणी शेर ,बाघ आदि केवल घास खाकर जीवित नहीं रह सकते हैं । इससे यह अचल प्रमाणित हो जाता है कि मानव के भोजन के लिए मांसाहार की जो धार्मिक एव वैज्ञानिक मान्यता है वह गलत है ।
नोट:- ” भारतीय काँपीराइट एक्ट के तहत प्रस्तुत सिद्धान्त में निहित समस्त प्रकाशित सामग्री के काँपीराइट हरि नन्द सरस्वती के पास सुरक्षित है । अतः कोई भी व्यक्ति अथवा कम्पनी इस लिखित प्रकाषित लेख को किसी भी तरह से शब्दों को तोड़ – मरोड़ कर आंशिक या पूर्ण रूप से किसी पुस्तक, सामाजिक न्यूजपेपर , मैगजीन , इत्यादि में प्रकाशक से बिना लिखित अनुमति के प्रकाशित करने की चेष्टा न करें अन्यथा समस्त कानूनी हर्जे एव खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे ।किसी भी प्रकार के मुकदमें के लिए न्यायक्षेत्र दिल्ली रहेगा ।

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( सन्त हरिनन्द सरस्वती 9811074545 )
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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